पर बातें दादी मां-सी करती है.
जब कभी कुछ नया देखती है
सवालों की झड़ी लगा देती है.
सूरज बाबा संग मुस्कराती जागती है
उठते ही बस दूध, पापे मांगती है.
जिद करे तो जिददी कहलाए
ना करे तो घर खाने को आए.
गानों की शौकीन
कभी "होले-होले" पर नाचे
कभी "तेरी शादी करूंगा" को गाए.
बच्चों संग खेलने को मचलती है
ना मिले जब कोई
"मेरे साथ खेलो" हमसे कहती है.
टाफ़ी हो, चाकलेट हो या हो फिर पेस्ट्री
याद आने पर दिन-भर मांगती रहती है.
किताबें डाल अपनी मम्मी के बैग में
स्कूल जाने की एक्टिंग वो खूब करा करती है.
खुद मेरे साथ जाकर लाई अपनी किताबें नहीं पढ़ती है
जब तब देखो मेरी मैंगजीनों को देखती-फाड़ती रहती है.
देर रात तक ऊधम मचाए
जब नींद आए तो झट से सो जाए.
सोती हुई प्यारी नजर आए
बस यूं ही देखते रहने को जी चाहे.
ऐ ख़ुदा रहम करना
कहीं मेरी ही नजर ना लग जाए.
-चुनमुन के पापा
~11.04.20011~

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