Saturday, September 27, 2025

पापाजी गाने और फिल्म दिल बहलाने के लिए होते हैं नाकि दिल लगाने के लिए

6.

~कमरे में घुसते ही सुना~

मां- पापा की नजर लग गई.

पापा- क्या हुआ भई?

मां- इसके पेपर का (बेटी) सेंटर नॉएडा पड़ गया. जोधपुर पड़ता तो एक दिन पहले जाते दो दिन रूककर आते. 

बेटी- मम्मी चिंता ना करो. मैंने दिल्ली में ही घूमने और खाने की जगह ढूंढ ली है.

मां- दिल्ली में!

बेटी- हां दिल्ली में  'मजनू का टीला'.


[ वैसे घूमने के चक्कर में ही बेटी ने पेपर के सेंटर में दूसरा आप्शन जोधपुर भरवाया था.]

~06.06.2023~


7.


कल गुड नाईट कहने से पहले हम बाप-बेटी जवान फिल्म के गाने की चर्चा कर रहे थे. क्योंकि शाहरुख उसे भी पसंद है.


बेटी- जवान फिल्म का गाना पसंद आया?

पापा- ये कोई गाना है! मुझे ऐसे गाने और ऐसी फ़िल्में पसंद नहीं आतीं. चाहे वो 'पठान' हो या फिर ये 'जवान'.

बेटी- ये बात तो है कि ये गाने इतने अच्छे नहीं हैं. बस एक डांस स्टेप को छोड़कर. लेकिन आप का पता क्या है. आप गाने और फिल्म दिल लगाकर देखते हो. और गाने और फिल्म दिल बहलाने के लिए होते हैं नाकि दिल लगाने के लिए.

~30.08.23~


8.


पापाजी मैं आपको कितनी बार कह चुकी हूं कि गाने और फ़िल्में दिल बहलाने के लिए होती हैं नाकि दिल लगाने के लिए.

[अभी एक गाने के पसंद ना पसंद के बाद.]

~12.09.23~


9.


बेटी- पापाजी पता है कल क्या हुआ?

पापा- क्या हुआ?

बेटी- वो मेरे क्लास का वो लड़का है ना. वो पूछने लगा कि तुम्हारी जाति क्या है? मैं बोली तुम गेस करो. मैं दावे के साथ कह सकती हूं. सही गेस नहीं कर पाओगे! फिर वो सोचकर बोला कि 'तुम बनिए हो'. मैं बोली और सोच लो. पापाजी आपके साथ भी तो हुआ होगा ऐसे ?

पापा- हां मेरे साथ भी बहुत होता था. फिर आगे क्या हुआ?

बेटी- मैं बोली कि हम लोग 'गुर्जर' हैं. तो पता है पापाजी वो लड़का एकदम से दंग रह गया. कुछ सैंकंड तो बस देखता रहा.


( हम दोनों बाप-बेटी खूब हंसते रहे. )


फिर बोला पर अंकल तो पूरे बनिए लगते हैं.


( फिर हम दोनों बाप-बेटी खूब जोरों से हंसने लगे)


[ दरअसल मेरे साथ भी ऐसा ही होता था.और ऐसा ही अब बेटी के साथ हो रहा है ]

~01.10.23~


पापाजी दुःख बैकग्राउंड की तरह बड़े-बड़े होते हैं और सुख स्टार की तरह छोटे-छोटे होते हैं

1.

~आजकल बेटी के 12 वीं कक्षा के बोर्ड के पेपर चल रहे हैं. आज उसका 'रसायन विज्ञान' का पेपर था~


बेटी- पापाजी मैं जब पेपर देने स्कूल में चली जाती हूं तो आप बाहर बोर नहीं होते. तीन घंटे बाहर बैठकर क्या करते हो?

पापा- कुछ खास नहीं. थोड़ा इधर-उधर पैदल टहल लेता हूं बस.

बेटी- कल आप एक काम करना.

पापा- क्या?

बेटी- कई साल हो गए पनीर वाली जलेबी खाए. ऐसा करना आसपास में कोई हलवाई की दुकान तो होगी ही. पनीर की जलेबी ले आना. आपका टाइम भी पास हो जाएगा. मेरे को पनीर की जलेबी खाने को भी मिल जाएगी.

 

2.


बेटी- अब मुझे लगता है कि दुःख बैकग्राउंड की तरह बड़े-बड़े होते हैं और सुख स्टार की तरह छोटे-छोटे होते हैं. 

~13.03.23~


3.

बेटी- पापाजी पेपर ख़त्म होने के बाद मैं किसी दिन सहेलियों के साथ सीपी घूमने जाऊंगी.

पापा- ओके. पर घूमने का प्लान शनिवार को रखना.

बेटी- क्यों?

पापा- शनिवार को जाओगे तो मैं आपके साथ चल पडूंगा. मैं कॉफ़ी हाउस चला जाऊंगा. और आप सहेलियों के साथ सीपी घूम लेना और फिर बाद में दोनों साथ-साथ घर आ जाएंगे.

बेटी- पापाजी ये कोई बात हुई. आखिर कब तक. अकेले जाने की शुरुआत आज नहीं तो कल करनी है ही. क्यों ना पेपरों के बाद से कर दें.

पापा- ठीक है भई.


~दो दिन बात~


पापाजी आज तो मौसम कह रहा है कि घूम लो. और बेटी सीपी घूमने चली गई.

~02.04.23~    


4.


पापा- बच्चू कल का कैसा करना है. मम्मी और मैं दोनों ही आपको छोड़ने नहीं जा पाएंगे.

बेटी- आप बताओ कैसे करना है. मुझे तो नहीं समझ आ रहा...अच्छा एक काम तो हो सकता है. यहां मेट्रो तक तो मम्मी छोड़ ही देगी. और उधर से?

पापा- उधर से. या तो पैदल ही निकल जाना. अगर देखे कि मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ नहीं और सर्विस लेन पर भी इक्का-दुक्का लोग ही हैं तो रिक्शा ले लेना. 

बेटी- वो तो मैं ले लूंगी लेकिन कोई-कोई रिक्शा वाला ड्रिंक किए होता है उसका? जब तक उसके रिक्शे में बैठो ना तब तक पता नहीं चलेगा!

पापा- एक काम करना, जो रिक्शे वाला नहाया-धोया से लगे यानि वेल ड्रेस हो. उस रिक्शेवाले को पूछ लेना.


~अभी कुछ देर पहले मैसेज आया~ 

Reached.

रिक्शा से या पैदल?

रिक्शा से.

गुड

~17.07.23~


 5.


बेटी- पापाजी आपका जमीर कैसे ALLOW कर गया.

पापा- क्यों क्या हुआ?

बेटी- मुझे खांसी है और आप हलवा बनवा रहे हो!

~20.05.2023~

पापाजी जब-तक हाथों में दुकानदारों के दिए दो-चार बैग ना हो तो फील नहीं आती है शॉपिंग की!


14.

एक किताब 'गुप्त भारत की खोज' पढ़ रहा था. और वो 'मिस्र के एक जादूगर के जादू' के रहस्य के बारे में बता रही थी. जिसकी वजह से सोने का मन ही नहीं हो रहा. वो भी रात 12 बजे. खैर कुछ देर में वो जादू पढ़ा तो डेस्कटॉप बंद किया. उसी के बीच में. 


बेटी- पापाजी आज सोना नहीं क्या?

पापा- बस अभी पांच मिनट में सोते हैं. बच्चू ये किताब भी क्या गजब है!

बेटी- पापाजी वो आपने 'अक्टूबर' फिल्म देखी है.

पापा- हां देखी है.

बेटी- कैसी है?

पापा- ठीक ही है.

बेटी- नेट पर बता रहे थे कि बहुत अच्छी फिल्म है.

पापा- इतनी भी बहुत अच्छी नहीं है कि...वो एक लड़की है.

बेटी- वो मैं कहानी नहीं पूछ रही. कहते हैं इसमें वरुण ने अच्छा काम किया है.

पापा- ठीक ही किया है. जब कोई फिल्म थोड़ी हटकर हो तो प्रशंसा तो होती है लेकिन ये उस तरह की हिट फिल्म नहीं होती. एक ख़ास तबका ही ऐसी फिल्म पसंद करता है. जैसे शाहरुख की एक अच्छी फिल्म थी ' कभी हां कभी ना'. लेकिन वो इतना नहीं चली. वहीँ शाहरुख की और फ़िल्में चलीं लेकिन वे इतना अच्छी नहीं थी.

बेटी- पापाजी वो क्या है ना हम फिल्म इसलिए देखने जाते हैं कि कुछ देर के लिए हम लाइफ से थोड़ा दूर हो सके. थोड़ा अच्छा फील कर सके.

पापा- हूं! अच्छा वो किताब थी ना.

बेटी- क्या पापाजी फिर से किताब ले आए! उसी से बचने के लिए तो मैंने फिल्म की बात चलाई थी

पापा- ओ हो!

बेटी- चलो अब बता ही दो क्या था किताब में.

पापा- नहीं रहने दो. जब आपका मन ही नहीं. तो क्या ही बताना.

बेटी- अब बता भी दो. ऐसा भी क्या है.

पापा- अरे अब नहीं.

बेटी- नहीं बताना है तो मत बताओ. अच्छा तो फिर गुड नाईट!

~25.10.22~ 


15.

~दोपहर में खाना खाने के बाद~


पापा- कुछ मीठा है?

पत्नी बेटी से-पापा तो सब कुछ खा जाएंगे.

पापा- बच्चू ने भी दो रसगुल्ले लिए हैं.

बेटी- मैंने तो सिर्फ दो ही रसगुल्ले लिए हैं. आपने तो रसमलाई भी खा ली. रसगुल्ले भी खा लिए, मिल्क केक भी खा लिया. अब काजू कतली भी ले ली और और!

~25.10.22~ 


16.


लंच के वक्त मैं Youtube पर RJ प्रवीण के विडियो देख रहा था.


बेटी- पापाजी ये क्या लगा रखा है. जब देखो इन्हें ही देखते रहते हो. आज शाहरुख़ खान का जन्मदिन है. कुछ उनका लगाओ. उनके जन्मदिन पर सेलिब्रेशन होना चाहिए!

मम्मी- शाहरुख को विश किया कि नहीं.

और फिर हम दोनों एक साथ हा-हा-हा! 

 ~02.11.22~


17.


बेटी- पापाजी पूरे दिन शॉपिंग करते रहे लेकिन फील नहीं आया शॉपिंग का!

पापा- क्यों भई. इतने पैसे खर्च हो गए. जिंदगी में पहली बार इतने महंगी जींस ली हैं मैंने और आप कह रही हैं कि फील नहीं आया शॉपिंग का.

बेटी- जो-जो खरीदते रहे. वो-वो घर से लेकर गए बैग में डालते रहे बस. जब-तक हाथों में दुकानदारों के दिए दो-चार बैग ना हो तो फील नहीं आती है शॉपिंग की!

~04.11.22~ 


18.


बेटी-पापाजी आज सुबह स्कूल जाते वक्त मुझे ओनर वाली फीलिंग आ रही थी.

पापा- मतलब?

बेटी- वो ना आज स्कूल वैन में कोई भी बच्चा नहीं था. मैं अकेली ही पीछे बैठी थी.

पापा- हा हा हा!

~01.11.22~


19.


बेटी- पापाजी मैंने फ्रीज से दो चॉकलेट बाहर रख दी है. जब वहां जाओ तो लेते जाना.

पापा- इनका मैं क्या करूंगा?

बेटी- करना क्या है जब भूख लगे तो खा लेना. मुझे पता है आप दावत में कुछ नहीं खाओगे.

~06.12.22~



20.


बेटी- पापाजी, ताऊजी क्यों आए थे?

पापा- आपकी जो मिलाई मिली थी वो देने आए थे.

बेटी- मिलाई की जगह लड्डू ही दे जाते! 


[ दरअसल शादी में बेटी को लड्डू खाने को नहीं मिले . अब अपनी मम्मी से कहती है कि मम्मी वो जो मेरी मिलाई के पैसे मिले हैं ना उससे हलवाई की दुकान से लड्डू ले आना. वो भी छोटी बूंदी के.]

~12.12.22~



पापाजी जब तबीयत ठीक ना हो तो कुमार गंधर्व नहीं बल्कि पार्टी सांग सुनते हैं

7. 

पापा- बच्चू.

बेटी- हां.

पापा- पुराना लिखा सुधारा है. सुनोगे.

बेटी- ये आप शायरी कर रहे हैं कि या कुछ कह रहे हैं.

पापा- ये तो गजब ही हो गया.

~15.07.2022~


8.


बेटी- पापाजी पापाजी आज तो हमारे स्कूल के बच्चों वाले पेपर में भी वो वाली खबर आ गई.

पापा- कौन-सी वाली ?

बेटी- अरे वही कि 'जुमलाजीवी' 'Unparliamentary Words' हो गया है. अब तो बच्चों को भी पता चल गया 'जुमलाजीवी' शब्द.


[दरअसल बेटी के स्कूल में टाइम्स ग्रुप का बच्चों के लिए एक पेपर मिलता है, जिसमें क्रॉसवर्ड, पजल आदि के साथ खास खबरें भी होती हैं.]

~15.07.2022~


9.


पिता- बच्चू पीछे वाले कबूतरों को दाना डालते तो हैं लेकिन अपनी छत पर नहीं अपने सामने वाली की छत पर!

बेटी- हो सकता है सोचते होंगे अकेले ही क्या सारा पुण्य कमाना. थोड़ा पुण्य पड़ोसी को भी लेने दो.

~19.07.2022~


10.


~बुखार होने पर~

पापाजी वो भी क्या दिन थे जब मैं बुखार में भी स्कूल जाता था!

~26.7.22~

 

11.


बेटी- पापाजी आपने कभी ड्रिंक की है?
पापा- नहीं तो
बेटी- और सिगरेट ?

पापा- कभी नहीं.
बेटी- क्या पापाजी आपने तो लजा दिए. एक बार पीने से कोई आदत लगती है. एक बार तो पीना ही चाहिए थी.

~12.08.22~


12.


अभी बेटी को बोला कि चुनमुनी अब पचास से अस्सी तक गिनती लिखकर दिखाओ. तो वो बोली कि 'पापाजी ये पचास को इंगलिश में क्या कहते है ?'

मैं बोला, 'फिफ्टी.'

वो बोली, 'अच्छा फाइव जीरो, पचास.'

अर्थात वो इंगलिश में गिनती लिख सकती है. पर हिंदी में लिखते वक्त उसे नानी याद आ जाती है. हाय री मेरी हिंदी.

अभी हिंदी दिवस मनाकर गई है. 

~18.09.22~ 


13.


पिता- सुबह नाश्ते में क्या लिया. 

बेटी- बनाना मिल्कशेक. 

पापा- आप रसोई से कुछ लोगे? 

बेटी- और क्या. बनना शेक से कुछ होता है क्या! ये बताओ कि आपको क्या लेना? 

पापा- एक कप चाय हो जाए. 

बेटी- ये बात आप सीधे-सीधे बोल सकते थे. यूं जलेबी की तरह गोल-गोल घुमाने की क्या जरुरत थी!

~09.09.22~


14.

~कुमार गंधर्व जी को सुन रहा था~ बेटी बोली,'क्या पापाजी! जब तबीयत ठीक ना हो तो ये सब नहीं सुनते. बल्कि पार्टी सांग सुनते हैं.'

~26.9.2022~

15.


~सुबह-सुबह~


पापा- आज नाश्ते में क्या है भई?

मम्मी- रात को आपने नमकीन दलिया ही तो बोला था. वही बना है. चुनमुन तो नाश्ते में ब्रेड टोस्ट लेगी. और लंच में वो हक्का नूडल लेगी और आपके लिए परांठे बन जाएंगे.

पापा- चुनमुन हक्का नूडल अब खा लेगी और ब्रेड टोस्ट लंच में ले लेगी. हैं ना चुनमुन!

बेटी- पापाजी आप सीधे-सीधे बोलो ना कि आपका मन भी हो रहा हक्का नूडल खाने. क्या बात को गोल-गोल घूमा रहे हो!

~30.10.22~

पापाजी ओह सॉरी जिओ तो आप इंस्टाल नहीं करोगे वो तो अंबानी का है ना!


3.

हम बाप-बेटी की बातें यूं ही शादी-ब्याह से शुरू हुई थीं. फिर लव-मैरिज से लेकर अरेंज-मैरिज तक होने लगी. मैंने यूं ही बेटी से पूछ लिया कि अच्छा एक बात तो बताओ.

पापा- आपको क्या लगता है पापा का कभी लव-अफेयर जैसा कुछ रहा होगा?

बेटी- आपको sad-सा देखकर लगता तो नहीं कि कभी कुछ.

पापा- sad-सा मतलब?

बेटी- ओह सॉरी. शायद मैंने गलत शब्द इस्तेमाल कर लिया. आप इसे यूं माने. जैसे आपने रसगुल्ले के बारे में खूब सुना हो. खूब पढ़ा हो. लेकिन कभी उसका स्वाद ना लिया हो. मतलब कभी खाने को ना मिला हो. कुछ ऐसा ही.


4.


पापा- बच्चू इस वाले काम में बिल्कुल भी मन नहीं लगता.

बेटी- हां. मैंने भी देखा कि इस काम में आपका मन नहीं लगता.

पापा- क्या किया जाए? इसको किए बिना काम भी नहीं चलेगा.

बेटी- आपको इस काम को करने का दवाब तो है नहीं. कि करना ही करना है. इसलिए ये काम डर से तो नहीं होगा. तो फिर इसे प्यार से करो.

पापा- मतलब?

बेटी- मतलब ये कि इसे करने के लिए. इसे टुकड़ो में बांटो. और जिस काम या चीज को ज्यादा प्यार से करते हो. मन से करते हो. उसे करने से पहले इस काम एक टुकड़े को निपटा दो. मतलब कि आप सुबह सोशल मीडिया पर जाए बिना नहीं रहते हो. तो एक डेडलाइन सेट करो कि इस काम का इतना हिस्सा जब तक पूरा नहीं होगा तब तक मैं सोशल मीडिया पर नहीं जाऊंगा. मैं तो पहले ऐसे ही करती थी. आपको तो पता ही मैं दही खाने की कितनी शौकीन हूं. जब मैं 6-7 क्लास में थी तो मेरा किसी-किसी को पढ़ने का मन ही नहीं करता था. जब मन ही नहीं होगा तो सवाल-जवाब याद कैसे होंगे. तो फिर मैंने ये आईडिया निकाला कि जब तक मैं इस टॉपिक को अच्छे से समझ या याद नहीं कर लूंगी तब दही नहीं खाऊंगी. बस फिर क्या था. मेरा काम हो जाता था. आप भी ऐसे ही करो.

पापा- अरे आईडिया तो अच्छा है. देखता हूं.

बेटी- देखो नहीं करो.

~02.02.22~


5.


बेटी के स्कूल से निकलने के बाद मैंने पूछो, और बच्चू कैसा गया पेपर?' बेटी ने हाथ से फिफ्टी-फिफ्टी वाला इशारा किया. मेरे को एकदम से झटका लगा. उस झटके वाली मुद्रा में ही मैंने बेटी को देखा तो वो बिल्कुल शांत-सी थी. जैसे कह रही हो पापाजी चिल.

फिर बाद में चहकते हुए बोली, 'पापाजी पता आज हमने अपनी क्लास में पंखा चलाया. क्या पॉजिटिव वाइब्स आ रही थीं. अब हम भी पंखा चलाएंगे. हैं ना!!'

और फिर नहाने-धोने के बाद. जब सोने जाने लगी तो बोली, 'पापाजी आपकी वजह दिन में पंखा नहीं चला रही हूं लेकिन शाम को तो चलाएंगे.'  

~14.03.2022~ 


6.


पापा- बच्चू मोबाइल में क्या देख रहे हो?

बेटी- कुछ नहीं.

पापा- कुछ तो देख रहे हो. लीड हटाकर देख लो हम सुनकर काम चला लेंगे.

बेटी- पापाजी आप एक काम करो. प्राइम इंस्टाल कर लो मोबाइल में. पासवर्ड मेरे से ले लो. वरना एक और आईडिया है. वो आप 'दसवीं' फिल्म देखने के लिए कह रहे थे ना. जिओ इंस्टाल कर लो. ओटीपी मम्मीजी से ले लो. ( कुछ सेकंड का पॉज.) ओह सॉरी जिओ तो आप इंस्टाल नहीं करोगे, वो अंबानी का है ना!


[बेटी ये नहीं कह रही है कि चलो पापाजी आपका पीसी खराब हो गया तो मेरे मोबाइल से फिल्म देख लो. भई आजकल के बच्चों को अपना मोबाइल नहीं देना. बल्कि जिस दिन पीसी खराब हुआ था. तो कह रही थी कि पापाजी जब भी आपका पीसी खराब हो जाता है ना. तो आप अजीब-सी बातें करने लगते हो!]


निडर बेटी के डरपोक पापा ने आखिरकार वैक्सीन लगवाई

 

1.

बेटी- पापाजी ये इतनी सुरसुरी कहां से आ रही हैं?
पापा- पता नहीं. वैसे सुरसुरी से याद आया...
बेटी- बस रहने दो..

पापा- सुनो तो सही. 

बेटी- हमें पता है. आपके अंदर का इंसान जाग गया होगा! 

पापा- अरे भई सुनो तो सही.
बेटी- चलो सुनाओ.
पापा- मैं कल जब बाथरूम तो देखा बाथरूम की सीट पर एक सुरसुरी उलटी पड़ी, छटपटा रही थी. मैंने सोचा कि कहीं ये ऐसे ही छटपटाते कहीं पानी में गिर गई तो समझो गई काम से. मैं कमरे में आया कागज को चम्मच बनाया. सुरसुरी को उस पर बैठाकर कूड़े की बाल्टी में डालने के लिए छज्जे पर ले आया. फिर ध्यान आया कि कहीं कूड़ा निकालते वक्त ये मर गई तो. फिर क्या था कागज पर से उस सुरसुरी को छज्जे पर ही गिरा दिया और कागज कूड़े की बाल्टी में डाल दिया.
बेटी- बहुत अच्छा किया. अब वो उधर से कमरे में आ जाएगी.
पापा- तो क्या हुआ!

बेटी- क्या हुआ मतलब मुझे दिक्कत होती है. मैं सोचती हूं अगर आप जानवर होते और जंगल में रहते तो कैसे रहते? आपके लिए तो जीना मुश्किल हो जाता है. कैसे रहते आप जंगल में?


2.

~निडर बेटी के डरपोक पापा ने आखिरकार वैक्सीन लगवाई ~


पापा- बच्चू अब तो कुछ राज्य सरकारें बिना वैक्सीन वालों को पब्लिक प्लेस में जाने से रोकने वाली हैं.

बेटी- हां पापाजी मैंने भी पढ़ा था. अगर ऐसा हुआ तो मेरा स्कूल तो इसे सबसे पहले लागू करेगा.

पापा- फिर क्या करें? आपके स्कूल या पढाई के चक्कर में इधर उधर जाना हुआ तो कैसे करेंगे?

बेटी- करना क्या है. अपने डॉक्टर दोस्तों से बात करो कि ऐसी-ऐसी बात है. मुझे क्या करना चाहिए? जो वे कहेंगे, वो हम कर लेंगे.

पापा- पर बच्चू...

बेटी- अरे पापाजी. जो होगा देखा जाएगा. आप पहले बात तो करो...


अगले दिन


पापा- बच्चू वे तो कह रहे हैं कि लगवा लो. डरने की जरूरत नहीं है.

बेटी- बस. मैं तो पहले ही कह रही थी कि डरना-वरना छोड़ो. बस हमने सरकारी में जाकर नहीं लगवानी. क्योंकि वहां भीड़ होती है. और...

पापा- ठीक है. अब लगवाते ही हैं. जो होगा देखा जाएगा.

बेटी- देखना आपको कुछ नहीं होगा. आपको तो बुखार भी नहीं आएगा.

पापा- ओके.


रात 12 बजे.


बेटी- पापाजी रजिस्ट्रेशन कर दूं.

पापा- अब रात को.

बेटी- जो काम कल करना वो आज रात को ही सही.

पापा- ओके

बेटी- हो गया..बस एक दिक्कत स्लॉट नहीं आपकी उम्र का.

पापा- देखा! मैं ना कहता था. कुछ-कुछ गड़बड़ होगा.

बेटी- पापाजी कूल. स्लॉट भी मिल जाएगा. क्या पता सुबह तक मिल जाए.

पापा- अब इस बात की टेंशन.

बेटी- अरे पापाजी. फिर से. अच्छी बात सोचते-सोचते सो जाओ. कुछ नहीं तो उस किताब के बारे में सोचते हुए सो जाओ, जिसके बारे में मुझे बता रहे थे. नींद आ जाएगी. सुबह का सुबह देखेंगे.

पापा- ओके.


अगली सुबह


पापा- बच्चू अब भी स्लॉट नहीं मिल रहा.

बेटी- एक मिनट मैं देखती हूं.मिला-मिला. लेकिन ये तो दो जगह ही है पूरी दिल्ली में. वो भी इतनी दूर.

पापा- कोई नहीं पापाजी. मिल रहा है तो जल्दी से बुक करो.

बेटी- ओके. देखा हो गया. आप यूं ही हाय-तोबा मचा रहे थे.


जाने से पहले


पापा- बच्चू चलता हूं.

बेटी- सब समान रख लिया.

पापा- हां.

बेटी- ये रख लिया. वो रख लिया. मोबाइल ले लिया. पैसे रख लिए. मास्क कौन से वाले लगाए हैं?

पापा- एक सर्जरी वाला, बाकी दो और.

बेटी- लोग एक मास्क भी नहीं लगा रहे है. और आप तीन-तीन

पापा- हम हम हैं. वो वो हैं

बेटी- बाय-बाय.

पापा- बाय-बाय.


घर आने पर


बेटी- लग गया.

पापा- हां.

बेटी- दर्द तो नहीं हो रहा.

पापा- ना.

बेटी- गुड.

~04.01.22~