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Saturday, September 27, 2025

पापाजी जब तबीयत ठीक ना हो तो कुमार गंधर्व नहीं बल्कि पार्टी सांग सुनते हैं

7. 

पापा- बच्चू.

बेटी- हां.

पापा- पुराना लिखा सुधारा है. सुनोगे.

बेटी- ये आप शायरी कर रहे हैं कि या कुछ कह रहे हैं.

पापा- ये तो गजब ही हो गया.

~15.07.2022~


8.


बेटी- पापाजी पापाजी आज तो हमारे स्कूल के बच्चों वाले पेपर में भी वो वाली खबर आ गई.

पापा- कौन-सी वाली ?

बेटी- अरे वही कि 'जुमलाजीवी' 'Unparliamentary Words' हो गया है. अब तो बच्चों को भी पता चल गया 'जुमलाजीवी' शब्द.


[दरअसल बेटी के स्कूल में टाइम्स ग्रुप का बच्चों के लिए एक पेपर मिलता है, जिसमें क्रॉसवर्ड, पजल आदि के साथ खास खबरें भी होती हैं.]

~15.07.2022~


9.


पिता- बच्चू पीछे वाले कबूतरों को दाना डालते तो हैं लेकिन अपनी छत पर नहीं अपने सामने वाली की छत पर!

बेटी- हो सकता है सोचते होंगे अकेले ही क्या सारा पुण्य कमाना. थोड़ा पुण्य पड़ोसी को भी लेने दो.

~19.07.2022~


10.


~बुखार होने पर~

पापाजी वो भी क्या दिन थे जब मैं बुखार में भी स्कूल जाता था!

~26.7.22~

 

11.


बेटी- पापाजी आपने कभी ड्रिंक की है?
पापा- नहीं तो
बेटी- और सिगरेट ?

पापा- कभी नहीं.
बेटी- क्या पापाजी आपने तो लजा दिए. एक बार पीने से कोई आदत लगती है. एक बार तो पीना ही चाहिए थी.

~12.08.22~


12.


अभी बेटी को बोला कि चुनमुनी अब पचास से अस्सी तक गिनती लिखकर दिखाओ. तो वो बोली कि 'पापाजी ये पचास को इंगलिश में क्या कहते है ?'

मैं बोला, 'फिफ्टी.'

वो बोली, 'अच्छा फाइव जीरो, पचास.'

अर्थात वो इंगलिश में गिनती लिख सकती है. पर हिंदी में लिखते वक्त उसे नानी याद आ जाती है. हाय री मेरी हिंदी.

अभी हिंदी दिवस मनाकर गई है. 

~18.09.22~ 


13.


पिता- सुबह नाश्ते में क्या लिया. 

बेटी- बनाना मिल्कशेक. 

पापा- आप रसोई से कुछ लोगे? 

बेटी- और क्या. बनना शेक से कुछ होता है क्या! ये बताओ कि आपको क्या लेना? 

पापा- एक कप चाय हो जाए. 

बेटी- ये बात आप सीधे-सीधे बोल सकते थे. यूं जलेबी की तरह गोल-गोल घुमाने की क्या जरुरत थी!

~09.09.22~


14.

~कुमार गंधर्व जी को सुन रहा था~ बेटी बोली,'क्या पापाजी! जब तबीयत ठीक ना हो तो ये सब नहीं सुनते. बल्कि पार्टी सांग सुनते हैं.'

~26.9.2022~

15.


~सुबह-सुबह~


पापा- आज नाश्ते में क्या है भई?

मम्मी- रात को आपने नमकीन दलिया ही तो बोला था. वही बना है. चुनमुन तो नाश्ते में ब्रेड टोस्ट लेगी. और लंच में वो हक्का नूडल लेगी और आपके लिए परांठे बन जाएंगे.

पापा- चुनमुन हक्का नूडल अब खा लेगी और ब्रेड टोस्ट लंच में ले लेगी. हैं ना चुनमुन!

बेटी- पापाजी आप सीधे-सीधे बोलो ना कि आपका मन भी हो रहा हक्का नूडल खाने. क्या बात को गोल-गोल घूमा रहे हो!

~30.10.22~

पापाजी जो मजा अपने कमाए पैसे से घूमने में है वो पेरेंट्स के पैसे में नहीं

 1.

पापा- हां तो बच्चू मैं कहां था!

बेटी- आप कहीं नहीं. यहीं थे! अपनी कुर्सी पर बैठो और खुद भी काम करो. और हमें भी काम करने दो. समझे पापाजी!   


[दरअसल बेटी मोबाइल से स्कूल की हाजिरी लगा रही थी. तो हम अपने जमाने की हाजिरी के किस्से सुनाने लगे. ]


2.


बेटी- आज खाना खाने में मजा आएगा.

पिता- क्यों भई, क्या हुआ?

बेटी- आज पंखा जो चल रहा है!
~27.02.21~


3.


अभी हम बाप-बेटी छत पर घूम रहे थे. इस वक्त हम दोनों दुनिया जहां की बातें करते हैं.

आज कह रही थी पापाजी आपका घूमने का मन नहीं करता? जब आप छोटे थे तब करता था? अच्छा अगर घूमने जाना हो तो कहां जाना पसंद करोगे?


मैं अपनी बात करने लगा. अपने दिल की परतों को खोलने लगा. फिर बीच में उसने एक बात कही कि पता है 'पापाजी हमें पेरेंट्स के पैसे से अपनी need पूरी करनी चाहिए और ना कि मस्ती, घूमना फिरना. जो मजा अपने कमाए पैसे से घूमने में है, वो पेरेंट्स के पैसे में नहीं.'

~17.03.2021~


4.

पापा- बच्चू क्या देख रहे हो?

बेटी- सवाल देख रही हूं.

पापा - अरे भई देखो नहीं करो.

बेटी - पहले समझूंगी तब ही करूंगी ना.

पापा - हां ये बात भी है. चलो देखो. कुछ समझ नहीं आया तो पूछ लेना.

बेटी - हां-हां. वैसे नेट पर समझाने वाले भी मिल जाते हैं. क्योंकि पहले आप समझोगे फिर मुझे समझाओगे. समय लगेगा. आप तो छोड़ो.

पापा - हां कह तो सही रही हो. वैसे इस बार आपके जो भी नंबर आएंगे. उसमें सिर्फ और सिर्फ आपकी ही मेहनत होगी क्योंकि स्कूल खुले नहीं. ट्यूशन आप गए नहीं. और मैं पढ़ा पाया नहीं.

बेटी - हां-हां. आप main point पर आओ.

पापा - यानि सब आपकी मेहनत और काबिलियत पर निर्भर करता है कि इस बार आपका रिजल्ट क्या आता है. और साइंस लेने के लिए आपको 85 % प्रतिशत नंबर लाने होंगे. देख लो बच्चू!

बेटी - ये मुझे भी पता है.

पापा - आपका रिजल्ट अच्छा आ गया और मेरे पास पैसे आ गए तो समझो आपका लैपटॉप पक्का.

बेटी - ओ हो. आप मेरे को रिश्वत दे रहे हो  सच बताऊं. मुझे आजतक ये समझ नहीं आया कि मां-बाप ऐसी रिश्वत क्यों देते हैं. हां ये अलग बात जब रिजल्ट अच्छा आ जाए तो सरप्राइज के तौर लैपटॉप जैसा कुछ भी दे दो. तो खुशी होती है. लेकिन ये रिश्वत  अपने पल्ले नहीं पड़ती! वैसे भी जब हमें किसी चीज की जरूरत होगी तो खुद ही कमाएंगे और ले लेंगे तब. चलो बहोत हो गया लैपटॉप, पेपर, रिजल्ट. आप अपने डेस्कटॉप पर बैठो..और हम अपने मोबाइल पर सवाल समझते हैं.

~10.04.21~


5.


पापा- बच्चू एक बात तो बताओ.

बेटी-.....

(बेटी मोबाइल में कुछ सर्च कर रही है.)


पापा- पूछो-पूछो.

बेटी- अगर मैं नहीं पूछूंगी तो क्या आप नहीं बताओगे!

पापा- बताऊंगा.

बेटी- फिर बताओ.

पापा -पहले पूछो तो सही.

बेटी- हां बताओ, आप क्या कह रहे थे.

पापा- मैं कह रहा था कि ये जो मेरा दर्द है ना. खाना खाने के बाद कम क्यों हो जाता है?

बेटी- अभी मैंने डॉक्टर बनने की सिर्फ सोची है. डॉक्टर अभी बनी नहीं हूं. जब डॉक्टर बन जाऊंगी तब इस पर बात करेंगे. ठीक है!

~13.05.21~


6.


पिता- बच्चू कल से भारत में फेसबुक और ट्विटर बंद होने वाले हैं.

बेटी-फिर आपका गुजारा कैसे चलेगा!   

~25.05.21~


7.


बेटी- पापाजी आपका टेस्ट (पसंद) जैसा है ना. या तो आपको रईस होना चाहिए था या फिर रईस घर में पैदा!     

~12.06.21~


8.


दो चार दिन से बेटी को 'जेएनयू' के कुछ किस्से सुना रहा हूं..आज सुबह जब मेट्रो में बंदर वाला विडियो देखा तो बेटी को 'जेएनयू' का एक बंदर वाला किस्सा सुनाने लगा. सुनकर बेटी बोली-'पापाजी आपको तो 'जेएनयू का ब्रांड एम्बेसडर' बना देना चाहिए.

~21.06.21~


मम्मीजी मेरे लिए नारियल पानी और पापाजी के लिए समोसे!


7.

बेटी- पापाजी भूख लगी है.

पापा- बस दो मिनट.


[बेटी को बुखार की वजह से रोटी अच्छी नहीं लग रही और फिर खाई भी नहीं. अब कह रही है कि भूख लगी है. इसलिए छिपाकर रखे चिप्स देने पड़े. ]

~06.08.2017~


8.


बेटी- पापाजी ये कोई बात हुई. हम बुखार में आपका मुंह देंखे और आप समोसे खाएं. दो दिन बाद नहीं खा सकते थे!

पापा- इसमें मेरी क्या गलती. जब मम्मी लाई हैं. तो मैं खाऊंगा ही ना!

बेटी- मम्मीजी मेरे लिए नारियल पानी और पापा के लिए समोसे! आप भी ना. जाओ....!

~15.09.2017~


9.


बेटी- पापाजी सुप्रीम कोर्ट के आर्डर का क्या हुआ ?

पापा- क्यूं क्या हुआ?

बेटी- खूब जमकर बम और पटाखे फूट रहे हैं. छत पर जाकर देखो कितना धुँआ हो रखा है.

पापा- बच्चू पटाखे फोड़ने पर पाबंदी नहीं थी, बेचने पर पाबंदी थी!!

~19.10.2017~


10.


बेटी- पापाजी आपने एक बात नोटिस की.

पापा- क्या?

बेटी- अगर आपके बाल होते ना तो आप इतने अच्छे नहीं लगते, जितने बिना बाल के लगते हो!!

~07.11.2017~


11.


बेटी- पापाजी ये क्या बात हुई?

पापा- क्यूं भई क्या हुआ.

बेटी- शादी में जाओगे, वो भी घर से खाना खाके!! फिर शादी में क्या खाओगे?

पापा- अरे भई कन्यादान करके आ जाएंगे. हमारे जमाने में खाने नहीं, कन्यादान करने जाते थे.

बेटी- आपका जमाना तो गया. अब तो जितने पैसे देकर आते हैं, उतना तो जरुर खाकर आते हैं.

~13.11.2017~


12.


बेटी- पापाजी हमारा राष्ट्रीय खेल कौन-सा है ?

पिता- हॉकी

बेटी- तो फिर हम क्रिकेट ज्यादा क्यों खेलते हैं?

~21.11.2017~


13.


पिता- बच्चू लगता है, भूकंप आया है. देखो अपना टीवी हिल रहा है.

बेटी- पापाजी चुप रहो, नाटक देखने दो ना, प्लीज. आने दो जो आ रहा है!

~06.12.2017~


14.

बेटी- मम्मीजी जब आप हारने लगती हो तो ना रोने लगती हो. खेल में हार-जीत तो होती रहती है. 

~15.12.2017~