Showing posts with label पेपर. Show all posts
Showing posts with label पेपर. Show all posts

Saturday, September 27, 2025

पापाजी ओह सॉरी जिओ तो आप इंस्टाल नहीं करोगे वो तो अंबानी का है ना!


3.

हम बाप-बेटी की बातें यूं ही शादी-ब्याह से शुरू हुई थीं. फिर लव-मैरिज से लेकर अरेंज-मैरिज तक होने लगी. मैंने यूं ही बेटी से पूछ लिया कि अच्छा एक बात तो बताओ.

पापा- आपको क्या लगता है पापा का कभी लव-अफेयर जैसा कुछ रहा होगा?

बेटी- आपको sad-सा देखकर लगता तो नहीं कि कभी कुछ.

पापा- sad-सा मतलब?

बेटी- ओह सॉरी. शायद मैंने गलत शब्द इस्तेमाल कर लिया. आप इसे यूं माने. जैसे आपने रसगुल्ले के बारे में खूब सुना हो. खूब पढ़ा हो. लेकिन कभी उसका स्वाद ना लिया हो. मतलब कभी खाने को ना मिला हो. कुछ ऐसा ही.


4.


पापा- बच्चू इस वाले काम में बिल्कुल भी मन नहीं लगता.

बेटी- हां. मैंने भी देखा कि इस काम में आपका मन नहीं लगता.

पापा- क्या किया जाए? इसको किए बिना काम भी नहीं चलेगा.

बेटी- आपको इस काम को करने का दवाब तो है नहीं. कि करना ही करना है. इसलिए ये काम डर से तो नहीं होगा. तो फिर इसे प्यार से करो.

पापा- मतलब?

बेटी- मतलब ये कि इसे करने के लिए. इसे टुकड़ो में बांटो. और जिस काम या चीज को ज्यादा प्यार से करते हो. मन से करते हो. उसे करने से पहले इस काम एक टुकड़े को निपटा दो. मतलब कि आप सुबह सोशल मीडिया पर जाए बिना नहीं रहते हो. तो एक डेडलाइन सेट करो कि इस काम का इतना हिस्सा जब तक पूरा नहीं होगा तब तक मैं सोशल मीडिया पर नहीं जाऊंगा. मैं तो पहले ऐसे ही करती थी. आपको तो पता ही मैं दही खाने की कितनी शौकीन हूं. जब मैं 6-7 क्लास में थी तो मेरा किसी-किसी को पढ़ने का मन ही नहीं करता था. जब मन ही नहीं होगा तो सवाल-जवाब याद कैसे होंगे. तो फिर मैंने ये आईडिया निकाला कि जब तक मैं इस टॉपिक को अच्छे से समझ या याद नहीं कर लूंगी तब दही नहीं खाऊंगी. बस फिर क्या था. मेरा काम हो जाता था. आप भी ऐसे ही करो.

पापा- अरे आईडिया तो अच्छा है. देखता हूं.

बेटी- देखो नहीं करो.

~02.02.22~


5.


बेटी के स्कूल से निकलने के बाद मैंने पूछो, और बच्चू कैसा गया पेपर?' बेटी ने हाथ से फिफ्टी-फिफ्टी वाला इशारा किया. मेरे को एकदम से झटका लगा. उस झटके वाली मुद्रा में ही मैंने बेटी को देखा तो वो बिल्कुल शांत-सी थी. जैसे कह रही हो पापाजी चिल.

फिर बाद में चहकते हुए बोली, 'पापाजी पता आज हमने अपनी क्लास में पंखा चलाया. क्या पॉजिटिव वाइब्स आ रही थीं. अब हम भी पंखा चलाएंगे. हैं ना!!'

और फिर नहाने-धोने के बाद. जब सोने जाने लगी तो बोली, 'पापाजी आपकी वजह दिन में पंखा नहीं चला रही हूं लेकिन शाम को तो चलाएंगे.'  

~14.03.2022~ 


6.


पापा- बच्चू मोबाइल में क्या देख रहे हो?

बेटी- कुछ नहीं.

पापा- कुछ तो देख रहे हो. लीड हटाकर देख लो हम सुनकर काम चला लेंगे.

बेटी- पापाजी आप एक काम करो. प्राइम इंस्टाल कर लो मोबाइल में. पासवर्ड मेरे से ले लो. वरना एक और आईडिया है. वो आप 'दसवीं' फिल्म देखने के लिए कह रहे थे ना. जिओ इंस्टाल कर लो. ओटीपी मम्मीजी से ले लो. ( कुछ सेकंड का पॉज.) ओह सॉरी जिओ तो आप इंस्टाल नहीं करोगे, वो अंबानी का है ना!


[बेटी ये नहीं कह रही है कि चलो पापाजी आपका पीसी खराब हो गया तो मेरे मोबाइल से फिल्म देख लो. भई आजकल के बच्चों को अपना मोबाइल नहीं देना. बल्कि जिस दिन पीसी खराब हुआ था. तो कह रही थी कि पापाजी जब भी आपका पीसी खराब हो जाता है ना. तो आप अजीब-सी बातें करने लगते हो!]


हेल्लो पापाजी जब आओ ना तो कुछ मीठा लेते आना!

9 .

बेटी- पापाजी पांच रुपए दो.

पापा- क्यूं भई! आज तो आपका पेपर है. और आप जल्दी आ जाओगे.

बेटी- पापा आप भी ना. पेपर तीन घंटे का होता है और मैं पेपर जल्दी कर लेती हूं तो बाकी टाइम मैं क्या करूं ? इसलिए चीजी लेकर जाऊँगी. खाली टाइम में खाऊंगी !!

~17.09.2016~


10.


पापाजी आप कहां हो? जब आओ ना तो कुछ मीठा लेते आना!

~15.09.2016~


11.


बेटी-पापाजी पेपर के टाइम हमारे स्कूल में प्रेयर नहीं होती.

पापा- क्यों?

बेटी- पेपर के दिन प्रेयर होनी ही चाहिए ना पापाजी! इस दिन इसकी ज्यादा जरूरत होती है.

~21.09.2016~


12.

पापा- बच्चू कल का क्या प्लान है. केक-वेक काटना है कि नहीं!

बेटी- पता नहीं!

पापा- क्यूं भई.

बेटी- कोई फैंसी ड्रेस तो है नहीं!


[ लो कर लो बात...बिना नई ड्रेस के केक कटेगा ही नहीं !!]

~26.09.2016~


13.


बेटी- पापाजी ये भी कोई बात हुई!

पापा- क्यूं भई क्या हुआ?

बेटी- MCD के स्कूलों की तो छुट्टी है और हमारी नहीं, क्या हम बच्चे नहीं हैं!!

~05.11.2016~


14.


मम्मी- मैडम जी ने सिर्फ मेरे लिए ही केक भेजा है.

बेटी- पापाजी मरीज लोग कोई केक खाते हैं 🙂 🙂


[स्कूल से एक मैडम जी ने हमारी मैडम के लिए बेटी के हाथ केक भेजा. उसी के लिए दोनों में लड़ाई हो रही थी.]

~23.12.2016~


15.


बेटी- पापाजी कुछ याद है. कल मैंने कुछ बोला था.

पिता- क्या बोला था.

बेटी- फिर भूल गए. बादाम खाया करो बादाम. मैंने बोला था कि आज मम्मी को देखने हमारी मैडम आएंगी. कमरा जरा चमका देन. 

पिता- ओके


(बेटी स्कूल जाने से पहले।) 

~24.12.2016~


पापाजी अपना चश्मा ले आए? नहीं ना. क्या पापाजी सब कुछ मुझे ही याद दिलाना पड़ता है

 8.

सुबह-सुबह बेटी ने कह दिया है कि आज मेरे लिए कुछ खाने की चीज मत लाना, पर खेलने की चीज जरुर लाना. मेरे पेपर खत्म हो जाएंगे तो खेलूंगी ना. ठीक है! सुन लो खाली हाथ मत आना!

~16.09.2013~


9.


पापा- बच्चू पेपर कैसा गया ?
बेटी- बहुत अच्छा.

पापा- बहुत अच्छा मतलब खराब.

बेटी- बुद्धु पापा बहुत अच्छा मतलब अच्छा। मैंने सारे सवालों कर दिए।

मां- आठ सवालों में से केवल पांच करने थे। और ये सारे सवाल कर आई।

बेटी- पापाजी सारे सवाल इजी थे ना तो मैं सारे कर आई.


10.


वो अपना चश्मा ले आए? नहीं ना. क्या पापाजी सब कुछ मुझे ही याद दिलाना पड़ता है.

~25.9.2013~


11.


बेटी- पापाजी मैंने अपनी दोनों मैडम को पैन गिफ्ट कर दिया.

पापा- अरे भाई जन्मदिन आपका है या आपकी मैडम जी का! जिसका जन्मदिन होता है उसे गिफ्ट मिलता है. ना कि वो किसी को गिफ्ट देता है. समझे!

बेटी- अरे पापा आप बिल्कुल बुद्धु हो, आपको कुछ नहीं पता!!


12.


बेटी- पापाजी धीरे-धीरे करो ना कंघी... बाल खींचते हैं.

पापा-मैंने कल कहा था ना कि बालों में मम्मी से तेल लगवा. आज शेम्पू किया है. नहीं तो सुबह मत बोलना कि बाल खींचते हैं.

बेटी- अब मैं का करुं! मैं भूल गई थी. आप भी तो भूल जाते हो!

पापा- अच्छा दो चोटी करनी है या....

बेटी- दो करो या चार...बस बाल मत खींचो पापाजी!!

पापा- अच्छा ठीक है.


13.


बेटी- पापाजी एक बात पूंछू बताओगे...

पापा- क्या?

बेटी- पापाजी हम सब एक धर्म के क्यों नहीं हैं. हम हिन्दू हैं. वो अंकल मुसलमान है. और हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरदार हैं. और पापाजी ईसाई भी होते हैं.

पापा- मैं क्या बताऊं....कि ऐसा क्यूं है.

बेटी- पापाजी बताओ ना!

पापा- बच्चू मुझे नहीं पता.

बेटी- अच्छा फिर ये बताओ कि चंदा मामा रात को ही क्यों दिखता दिन में क्यों नहीं?

पापा- ये तो मुझे पता है. वो ना....

~21.10.2013~

 

14.


बेटी- पापाजी पापाजी कल मेरी क्रिसमस की छुट्टी है. कुतुब मीनार चलें... बहुत दिन हो गए. मैं घूमने नहीं गई. 

पापा- वहां क्या करोगी. वहां सिर्फ बड़ी-सी मीनार है. और खंडहर! 

बेटी- नहीं पापाजी मेरे को कुतुब मीनार ही जाना है. 

-एक दो मिनट के बाद-

बेटी- पापाजी वहां होटल तो होगा ही ना खाने-वाने के लिए. 

पापा- बच्चू वहां कोई होटल-वोटल नहीं है.

बेटी- तो फिर मैं नहीं जा रही कुतुब मीनार.

~24.12.2013~