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Saturday, September 27, 2025

पापाजी पंखा चला लूं

1.

पापा- चुनमुन उठो भई. सात बजने वाले हैं.

बेटी- पापाजी बस पांच मिनट.

पापा- कल तो बड़ी-बड़ी बातें कर रही थीं कि पापाजी कल जल्दी उठा देना. अब तो स्कूल भी खुलने वाले हैं. और अब बस पांच मिनट.

बेटी- पापाजी बस दो मिनट.

पिता- कल जब स्कूल खुलेंगे तो क्या करोगे ?

बेटी- पापाजी जब सिर पर पड़ती है तो सब आगे-आगे भागने लगते हैं!

~15.01.19~


2.


सुबह-सुबह एक चैनल की हैडलाइन थी.


~बजट का महाकुंभ~


इसे सुनकर बेटी बोली- पापाजी कुंभ खत्म हो गया क्या?

पापा- नहीं तो.

बेटी- वैसे लोग वहां जाकर क्या करते हैं?

पापा- वहां नहाकर अपने पाप धोते हैं!

बेटी- फिर लोग पाप करते ही क्यूं हैं ?

~01.02.19~


3.


बेटी- पापाजी ये हमारे स्कूल वाले गजब ही हैं.

पापा- क्यूं भई क्या हुआ?

बेटी- देखो पहले कह रहे थे कि अप्रैल में स्कूल खुलेंगे और अब कह रहे हैं कि 1 मार्च को स्कूल खुलेंगे.

पापा- तो क्या हुआ! घर में बोर होने से अच्छा है कि स्कूल में मस्ती करो. जब तक रिजल्ट नहीं आ जाता.

बेटी- वो तो ठीक है लेकिन 15 मार्च की जगह 16 मार्च को स्कूल खोलते तो ज्यादा अच्छा होता!

पापा- 15 और 16 मार्च में क्या फर्क है भई.

बेटी- अरे पापाजी 15 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे है ना.

पापा- तो फिर!!

बेटी- अरे मैं वर्ल्ड स्लीप डे के दिन खूब सोती. अब नहीं सो पाऊँगी. आप समझते नहीं हो!

~03.03.2019~


4.


बेटी- पापा जी आज पंखा चला ही लो.

पापा- क्यों भई? किस खुशी में? आपको दिख नहीं रहा कि मुझे बुखार है और आप पंखा चलाने को कह रहे हो!

बेटी- इसलिए तो कह रही हूं!

पापा- वाह! बहुत अच्छे!

बेटी- आप सुनो तो सही.

पापा- चलो सुनाओ.

बेटी- देखो अगर पंखा चलेगा तो आपको थोड़ी ठंड लगेगी और जब ठंड लगेगी तो आप कंबल जरुर ओढोगे.

पापा- तो फिर ?

बेटी- देखो जब आप दो-दो कंबल ओढेंगे तो आपको पसीना आएगा. और जब पसीना आता है ना तो बुखार उतर जाता है.

भई माफ करो.


~थोड़ी देर बाद~


बेटी- पापाजी पंखा चला लूं.

पापा- नैना!!


~फिर 10 मिनट बाद~


बेटी- पापाजी

पापा- चला लो.!

~18.03.19~


5.


बेटी- पापाजी कल सुबह 8 बजे स्कूल चलना है. रिजल्ट लेने के लिए.

पापा- अरे भई दादू को ले जाओ ना.

बेटी- आपको चलने में क्या दिक्कत है?

पापा- अरे समझा करो. दादू को ले जाओ ना.

बेटी- बाबाजी अपनी डीटीसी बस से ले जाएंगे. और आप ऑटो से. आप भी समझा करो!

~28.03.19~


'चुनमुन' ने अपने पापा का नाम 'बिल्ली' रखा

 

1.

चुनमुन बेटी ने मेरा नाम 'बिल्ली' रख दिया है. जब भी मेरे साथ खेलती है. बस बिल्ली ही पुकारती है. बिल्ली अब दूसरा गेम खेलते हैं. बिल्ली अब चीडिया उड़ी, भैंस उड़ी खेलते हैं. बिल्ली अब चूहा दोड़ बिल्ली आई खेलते हैं. जैसे ही खेल खत्म. फिर से वही पापाजी. अजी मेरा नाम ही नहीं उसने तो अपने चाचा का नाम भी 'मीना' रख दिया है. 


एक दिन शाम को जब आया तो देखा नैना अपने चाचा को बूढ़ढा ( उनके चाचा के बाल अभी से सफेद होने लगे हैं. इसी कारण से.) कह रही थी.
मैंने कहा 'बेटा ऐसे नहीं कहते. वो आपके चाचा हैं.' 

कहने लगी, 'पापाजी जब वो मेरे को मोटी बोलेंगे तो क्या मैं बूढ़ढा ना बोलूं'. अगर वो मुझे नैना कहेंगे तो मैं भी उन्हें चाचा बोलूंगी."


2.


एक दिन तबीयत ठीक नहीं थी. मैं लेटा हुआ था. चुनमुन आई और कहने लगी, 'पापाजी ये लो चने खा लो.' मैंने कहा, 'मैं बाद में खा लूंगा. मेरी तबीयत ठीक नहीं है. थोडी देर सोने दो.'
और चने मेरे पैरों के पास रखकर, मेरे पैरों के पास रखी चदर को मुझे उढ़ाने की कोशिश करने लगी. पर मैने कहा, 'नहीं रहने दो मैं खुद ही ओढ लूंगा'.  ~20.03.2009~


3.


शाम को चुनमुन पानी मांगने लगी कि पापाजी पानी पीऊंगी. तो देखा पानी की बोतल नहीं थी. मैने कहा कि बेटा पानी की बोतल नहीं है. मम्मी को आने दो वो लेके आएगी. तो कहने लगी मेरी बोतल में पानी है. तो मैने कहा कि तो पी लो. तो कहने लगी कि पापा इसमें पानी नहीं है. मैंने उल्लू बना दिया आपको. और हंसने लगी. 


4.


चुनमुन, थैंक यू कहने पर बेलकम कहती है. 

बातें खूब बनाती है. 

मुझे सिलेट पर गिनती लिखकर 

खुशी-खुशी दिखाती है.

~12.05.09~


5.


ऐसे ही काफी दिनों पहले मैं अपने डेस्कटॉप पर कुछ काम कर रहा था. बेटी को बेड पर रखा केला नजर आ गया. वह उसे उठाकर छीलने लगी. अक्सर उससे केला छिलता नहीं था. पर उस दिन उसने वह केला छील दिया. फिर मेरे पास आकर बहुत खुश होकर बोली, 'पापाजी मैंने केला छील दिया. मैं बड़ी हो गई.'


6.


एक दिन इसका चाचा इसके लिए छोटा-सा केक ले आया तो मैंने कहा, 'चुनमुन मुझे भी दे दो.' 

तो कहने लगी, 'इसे बड़े नहीं खाते, बच्चें खाते है.' 

और जल्दी-जल्दी सारा केक खा गई. 


7.


चुनमुन जब से स्कूल जाने लगी है, मैडम भी हो गई है. अपनी मम्मी से कहती है, 'मैं मैडम हूं. बताओ ऐ फोर क्या होता है?' 

उसकी मम्मी बोली, 'ऐ फोर आलू होता है.' 

फिर बेटी बोली, "अरे बुद्धु ये भी नहीं आता ऐ फोर एप्पल होता है.' 

~10.8.2009~


8.


हम तीनों यानि चुनमुन और उसके मम्मी पापा खाना खा रहे थे. तो मैंने राएते का बड़े वाला गिलास ले लिया. जब खाना खत्म होने को आया तो उसकी मम्मी, उसके पापा को कहने लगी आपने क्यों लिया बड़ा वाला गिलास. मैने तो आज राएता पिया ही नहीं. मेरा तो आधा रायता चुनमुन ही पी गई. मैं पी चुका था. पर चुनमुन पी रही थी. पर वह रुककर बोली,' मम्मा आप ये पी लो.' 


9.


रात को जब हम तीनों टीवी देख रहे थे. 

मैं चुनमुन की मम्मी को कहने लगा कि यार हाथ दबा दो. थोडा-सा दर्द है. पर उन्होंने मना कर दिया कि मैं खुद परेशान हूं. मैं नहीं दबा रही. तो नैना झट से बोली, 'पापा मैं दबाऊं.'. 

~11.09.2009~


10.


पापाजी जब लस्सी नहीं होती है. तो मैं पानी को ही लस्सी बना लेती हूं.